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Thursday, 4 December 2014

Agar Gale Nahi Milta To Hath Bhi Na Mila - Bashir Badr's Ghazal

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला

अगर गले नहीं मिलता, तो हाथ भी न मिला


घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे

बहुत तलाश किया, कोई आदमी न मिला


तमाम रिश्तों को मैं, घर में छोड़ आया था

फिर इसके बाद मुझे, कोई अजनबी न मिला


ख़ुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने

बस एक शख़्स को मांगा, मुझे वही न मिला


बहुत अजीब है ये कुरबतों की दूरी भी

वो मेरे साथ रहा, और मुझे कभी न मिला

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